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गाइड लाइन के नाम पर परेशान जनता ?
June 23, 2020 • सजग ब्यूरो
दिल्ली सरकार के कोरोना वारियर्स ने  दिल्ली की जनता को गाइड लाइन के नाम पर इस कदर परेशान कदर परेशान कर दिया है कि उनका जीवन दूभर हो गया है।आवासीय इलाकों और सोसाईटीयों को कंटेन्मेंट जोन और सीलिंग को गलत और मनमाने ढंग से लागू किया जा रहा है। जो कि घोषित दिशा निर्देशों का सरासर उल्लंघन है। यह किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है। इस मनमानी से पीड़ित लोगों ने जो मांग पत्र और अपनी शिकायतें भेजी हैं उन्हें भी रद्दी की टोकरी में दाल दिया गया है। सरकार की इस बदसलूकी से लोगों में हाहाकार की स्तिथि बन गई है। 
एक उदाहरण टाइम्स ऑफ इंडिया एकता गार्डन ग्रुप हाउसिंग सोसाइटी आई पी एक्सटेंशन पटपडगंज का है। यहां बी 3 ब्लॉक की सात मंज़िला इमारत जहां 28 परिवार रहते हैं। इन सब को क्वारन्टीन कर सील कर दिया गया क्योंकि वहां की पांचवी मंज़िल पर रहने वाले एक परिवार एक एक सदस्य में कोरोना पॉजिटिव पाया गया। परिवार के मुखिया से परिवार के अन्य सदस्य भी संक्रमित हो गए। परिवार का मुखिया समाजिक कार्यकर्ता है। इसी तरह से ए 2  ब्लॉक में एक निवासी की कोरोना के कारण मृत्यु हो गई। इस ब्लॉक को न कवारन्टीन घोषित किया गया और न ही सील किया गया।यह भेदभाव एक ही सोसाइटी में किया जा रहा है।
इस विषय पर विलास मेहरा सुभाषबगुप्त और पूर्व विधायक मीरा भारद्वाज ने प्रेस को दिए बयान में बताया कि इस समस्या पर अनेक अनुरोध पत्र व ज्ञापन उपराज्यपाल, उपयुक्त ईस्ट, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री व गृह मंत्री को भेजे गए। इसके बावजूद स्तिथि जस की तस बनी हुई है। बी ब्लॉक की सीलिंग नहीं हटाई गई।
इस स्थान पर चार पुलिसकर्मी बेकार में तैनात किए गए हैं। जिनका सदुपयोग किसी अन्य महत्त्वपूर्ण स्थान पर किया जा सकता है।
स्थानीय निवासी डॉ पवन शर्मा और महिला चिकित्सा विशेषज्ञ शकुंतला बलगोत्रा के अनुसार सीलिंग और क्वारनटिन करने की कार्रवाई त ब ही की जा सकती है जब एक क्षेत्र में तीन परिवार संक्रमित हों, यहां तो केवल एक परिवार को संक्रमण हुआ है। इसके बावजूद भेदभाव पूर्ण कार्यवाही  की गई है। इस सोसाइटी के प्रबंधन दिल्ली कोऑपरेटिव सोसाइटी रजिस्ट्रार के द्वारा नियुक्त दिल्ली सरकार का एक सेवानिवृत अधिकारी पिछले दो साल से कर रहा है।इस क्षेत्र में ऐसी कई  सोसाइटीज हैं जहाँ एक या दी परिवार कोरोना संक्रमित पाए गए जहां इस तरह की कोई कार्यवाही नहीं कि गई है। ऐसी सोसाइटीज़ में मैत्री, मिलान,टेक्नोलॉजी ,रास विहार आदि शामिल हैं।
सोसाइटी प्रशासक को प्रतिमाह 10000 मानदेय और 5000 रुपये यात्रा भत्ता प्रतिमाह दिया जाता है। एक निवासियों का कहना है कि  सेवानिवृत  इस अधिकारी की यह नियुक्ति कुछ असरदार लोगों की सिफारिश पर की गई थी। अधिकारी के सोसाइटी में दर्शन कभी कभी ही होते हैं। उसने अपनी नियुक्ति में सहयोगी बनाने वालों की विमर्श समिति बनाकर कार्य संचालन कर रहे हैं। अपने इस अधिकारी से सोसाइटी के निवासी परेशान हैं। स्वच्छता तथा अन्य नागरिक सुविधाओं का यहां बुरा हाल है। कानूनन प्रशासक को अपनी नियुक्ति के बाद सोसाइटी का चुनाव करवा कर इनका प्रबंधन चुने हुए प्रतिनिधियों को सौंप देना चाहिए।दो वर्ष बीत गए। यह ऐसा इकलौता उदाहरण है जहां न प्रशासक सोसाइटी छोड़ना चाहता है और न ही उसके कारिंदे उसकी विदाई चाहते हैं। जिस लिए इस प्रशासक की नियुक्ति हुई वह समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं। ये मुद्दे हैं खातों में गड़बड़ी,खातों की ऑडिटिंग बैलेंसशीट पहले तीन वर्षों में शामिल थे। अब तक न जांच हुई, न बैलेंस शीट बनी, न ही ऑडिटिंग हुई है।
 हैरत की बात यह है कि इस सोसाइटी में प्रशासक के चलते लिफ्ट बदहाल हैं। इनकी मियाद पूरी हो चुकी है। लिफ्ट तुरंत बदलने की सख्त जरूरत है। लिफ्ट मौत का कुआं बन गयी हैं। आश्चर्य की बात यह है कि ये लिफ्ट्स बिना किसी फिटनेस प्रमाणपत्र के गैर कानूनी तरीके से चलाई जा रही हैं जब कोई यहां बड़ा हादसा होगा तब प्रशासक जागेगा।