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ए टी एम फॉर इन्सिडीअस
February 18, 2020 • सजग ब्यूरो • दिल्ली

दिल्ली में एनडीएमसी कर्मचारियों की कुछ पल के बाद तन्ख्वाह एटीएम से काफूर हो गयी। क्या एटीएम बैंक के खातेदार दवारा किसी भी दिन किसी भी समय रकम निकालने के लिये है या अब ए टी एम फॉर इन्सिडीअस यानि धोखेदारों की लूट के लिये है। शरीफ लोगों के लिये बना ए टी एम अब इन्सिडीअस यानि धोखेबाजों के लिये वरदान बन रहा है। सबसे बड़ी बात है कि आई टी के युग में साइबर क्राइम बढ़ने से एटीएम  के साथ खिलवाड़ आसान हुआ है। इस तरह धोखेबाजों की चांदी और खातेदारों की बर्बादी हो रही है। दिनबदिन डेबिट कार्ड का क्लोन बना कर, डेबिट कार्ड का पासवर्ड पता लगाके खातेदारों के एकांउट से मोटी रकम निकालने या वटस्एप या  फ्रेंडशिप साइट पर दोस्ती के बाद विश्वास जीत कर  किसी न किसी बहाने से एटीएम से रकम निकालने तथा ऑन लाइन सेल पर धोखाधड़ी से ग्राहक के लुटने की शिकायतें बढ़ रही हैं। इतना ही नहीं सुनसान में कार सवार या पैदल चल रहे लोगों के साथ मारपीट करने और बंदूक दिखा कर उन्हें एटीएम ले जाकर उनके खाते को खाली करने की भी घटनायें आम हो गयी हैं। बैंक  खातेदारों को  एटीम का पासवर्ड बार बार बदलने की हिदायत देता है मगर खातेदार तो तभी जागते हैं जब उनका सबकुछ लुट जाता है और उनके पास निराशा के सिवाय कुछ नहीं बचता। जनता की मित्र पुलिस की अपनी प्राथमिकतायें हैं और सामान्यजनों की शिकायतों पर एक्शन लेना शायद उनकी बाद की प्राथमिकता होगी। पुलिस भी कहां कहां फर्ज निभाये। उनकी एक तिहाई से अधिक तादाद वीआईपी सुरक्षा में तैनात रहती है और दिल्ली जैसे शहर में यातायात पुल्स को बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की जरूरत रहती है। बाकी बचे पुलिस वाले अदालती मामलों में पेशी और नेताओं के उद्धाटन समारोहों में हाजिरी देने को मजबूर हैं। पुलिस वाले जरूरत  के समय छुट्टी नहीं ले सकते और दिन में 18 घंटे तक काम करते हैं। । कई बार तो एटीएम में रकम भरने जा रहे वाहन जबरन लूटे जाते हैं या एटीएम पर तैनात गार्ड को असहाय बना कर एटीएम खाली किये जा रहे हैं। एटीएम उठा कर लेजाने के मामले भी सुनाई देते हैं। दिल्ली में हद हो गयी, स्मार्ट सिटी बन रही एनडीएमसी के 200 कर्मचारियों की तनख्वाह बैंक में डाले जाते ही एटीएम धोखेबाजों के लिये सोने की खान बन गया । चंद मिनट में आई टी के कमाल से इन कर्मचारियों के खाते खाली हो गये। कहां जायें कर्मचारी। सुविधा के लिये बने एटीएम, बन गये मुसीबत।