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शिक्षा में संवेदनशील मुद्दों पर सही समझ विकसित करने की जरूरत
October 16, 2018 • Shiv Sachdeva

राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद, दिल्ली द्वारा विद्यालयी व्यवस्था में शारीरिक व मानसिक दंड के उन्मूलन हेतु विज्ञान भवन में एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। विद्यालय प्रणाली को  भयमुक्त और आनंददायक सीखने का  वातावरण बनाने के लिए प्रभावी रणनीतियों की पहचान, शारीरिक दंड के व्यापक सन्दर्भों/परिप्रेक्ष्य जैसे शारीरिक उत्पीड़न, मानसिक उत्पीड़न, भेदभाव, अनुशासन की नकारात्मक अवधारणा, अनभिज्ञता, यौन उत्पीड़न, दोषारोपण,नकारात्मक दृष्टिकोण से नाम संबोधन, शारीरिक व मानसिक दंड को रोकने तथा इससे निपटने के लिए भयमुक्त रणनीति आदि को समझने हेतु दिल्ली के विभिन्न सरकारी एवं निजी विद्यालयों में कार्यरत प्रधानाचार्यों/ शिक्षकों को निदेशिका, एससीईआरटी व संबन्धित  विषय विशेषज्ञों द्वारा प्रोत्साहित तथा प्रशिक्षित किया गया । प्रस्तुत कार्यक्रम में विद्यार्थियों के व्यक्तित्व मानस पर पड़ने वाले शारीरिक व मानसिक दंड के नकारात्मक प्रभावों पर चर्चा के अवसर उपलब्ध करवायेँ गए।

 प्रस्तुत प्रशिक्षण कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में माननीय उपमुख्यमंत्री एवं शिक्षा मंत्री श्री मनीष सिसोदिया ने कार्यक्रम के अंतर्गत महत्वपूर्ण विचार प्रस्तुत किए। उन्होने कहा कि आज शिक्षा में संवेदनशील मुद्दों पर सही समझ विकसित करने की जरूरत है। उन्होने भयमुक्त शिक्षा के बारे में चर्चा करते हुए कहा कि समाज और शिक्षा में डरे हुए विद्यार्थी बनाना सही नहीं है। उन्होने इस बात पर ज़ोर दिया कि हमें नई पीड़ी को  डरी हुई समाज व्यवस्था के नागरिक बनाने के बजाए आत्मविश्वास से भरे ,प्रतिभावान व ज़िम्मेदार नागरिक बनाना चाहिए। उन्होने कहा कि हमें बच्चे कि ऊर्जा को पहचानने तथा व्यवस्थित करने कि जरूरत है। बच्चों के प्रति वर्ग, जाति, धर्म, व लैंगिक आधार पर भेदभाव मानसिक दंड के प्रतीक है। साथ ही समाज, शिक्षा व व्यवस्था में असमानताओं को दूर करना बहुत जरूरी है।  इस संबंध में शिक्षा मंत्री द्वारा शारीरिक दंड तथा बाल उत्पीड़न पर एक ऑनलाइन प्रशिक्षण कार्यक्रम को भी आरंभ किया गया। इस ऑनलाइन प्रशिक्षण कार्यक्रम के द्वारा शिक्षा के विभिन्न हितधारकों को विद्यालयों में शारीरिक उत्पीड़न के उन्मूलन की आवश्यकता और उससे संबन्धित रणनीतियों के संबंध में व्यापक समझ विकसित होगी। कार्यक्रम के अंतिम सत्र में संयुक्त निदेशक द्वारा संदर्भित विषय के संबंध में अपने विचारों को साझा करते हुए प्रतिभागियों का धन्यवाद किया।