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रावण जलाना नहीं
October 1, 2019 • सत पाल

इस बार विजयदशमी पर रावण बनाना ज़रूर मगर जलाना नहीं क्योंकि बुराई का प्रतीक दशानन हर वर्ष जलाए जाने के बाद कभी मरता नहीं और अगले साल फिर दुतकारे जाने और जलने के लिए तैयार हो जाता है। ज्ञान के महापंडित रावण को दुनिया भर में सम्मान मिलता अगर वह खुद को बुराइयों के जाल में फंसा कैदी नहीं बनाता। इसका अर्थ है कि अच्छाई पर बुराई का लगा छोटा दाग भी अच्छाई को निरर्थक और अस्तित्वहीन बना देता है। जहां तक रावण बनाने की बात है इस बार प्लास्टिक पर प्रतिबंध के अभियान के बीच कई संगठनों और एन.जी.ओ. तथा समझदार लोगों ने प्लास्टिक का रावण बनाने की तैयारी कर ली है। कागज़, बांस और बम पटाख़ों के रावण से अच्छा तो प्लास्टिक का रावण है जिसे अगर जलाया नहीं जाए तो प्रदूषण नहीं फैलता। प्लास्टिक जलाने से तो एक साथ बेहद प्रदूषण होता है। दिल्ली में प्रतिदिन लगभग 690 टन प्लास्टिक वेस्ट निकलता है जबकि देश में प्रतिदिन 25940 टन प्लास्टिक वेस्ट निकलता है। इसमें से 40 प्रतिशत का संकलन नहीं किया जाता। देश की तरह दिल्ली की स्थिति भी गंभीर है। दिल्ली में  690 टन प्लास्टिक वेस्ट के सही निपटान के बगैर प्लास्टिक से होने वाले प्रदूषण को रोका नहीं जा सकता। सिंगल यूज़ प्लास्टिक पर रोक लगाने के प्रधानमंत्री के आह्वान के बाद हर क्षेत्र में  जागरूकता आई है। मदर डेयरी ने प्लास्टिक वेस्ट का विशाल रावण बना कर कई संगठनों को राह दिखाई है। प्लास्टिक का विशाल रावण बनाने से बड़ी मात्रा में प्लास्टिक वेस्ट का संकलन होगा और विजयदशमी के दिन बिना जलाए सारा प्लास्टिक वेस्ट रिसाइक्लिंग के लिए भेजा जाएगा। मदर डेयरी के एक और कदम की सराहना की जानी चाहिए जिसके तहत प्लास्टिक पैक में दूध की बिक्री को हतोत्साहित करने के लिए टोकन वाले खुले दूध का दाम 4 प्रति किलो कम किया गया है । पैक में बंद दूध से एक महीने में 2 किलो से अधिक प्लास्टिक एक व्यक्ति के शरीर में जाता है। एन.जी.ओ. चिंतन ने भी प्लास्टिक के कई रावण बना कर इसके रिसाइक्लिंग का काम शुरु कर दिया है। नोएडा में भी 1250 किलोग्राम प्लास्टिक वेस्ट का बड़ा चरखा बनाया जा रहा है जो चर्चा का विषय है। दिल्ली में एस.डी.एम.सी. ने कुछ ही दिनों में लगभग 50 मार्किट को प्लास्टिक मुक्त कर दिया है। सिंगल यूज़ प्लास्टिक के ख़िलाफ जागरूकता विकसित करने के लिए 1400 रैलियां आयोजित की गईं और 623 स्कूलों में नुक्कड़-नाटक, प्रश्नोतरी और चित्रकला प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। बच्चों को समझाया गया कि प्लास्टिक के अंधाधुंध इस्तेमाल से मानव जीवन, प्रकृति और पर्यावरण को बड़ा नुकसान पहुंच रहा है। प्लास्टिक पर प्रतिबंध से सफाई की स्थिति बेहतर बन सकती है। पांच विश्वविद्यालय भी प्लास्टिक मुक्त किए गए हैं। जनजागरूकता बढ़ रही है, बढ़ती जाएगी।