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राजनैतिक पार्टियां गाँधी जी के रास्ते पर चलें। अन्याय से लडे़ं। अपराधी को चुनाव में प्रत्याशी बनाना अन्याय ही है। उससे बचे।
January 30, 2019 • Shiv Sachdeva

महात्मा गाँधी के बलिदान दिवस पर राजनैतिक पाटियों से भारतीय मतदाता संगठन का निवेदन है कि वो गाँधी जी को श्रृद्धा सुमन अर्पित करने के लिए अन्याय से लड़ने का संकल्प लें। आगामी लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए राजनैतिक पार्टियों को चाहिए कि अपराधी व्यक्ति को चुनाव के लिए प्रत्याशी बनाना मतदाता और जनता के प्रति एवं लोकतन्त्र के प्रति अन्याय का काम ही है। जब कोई नागरिक या भारत सरकार या कोई संस्थान  पराधी व्यक्ति को ड्राइवर / चपरासी / स्वीपर या घर में नौकर भी नहीं रखना चाहते हैं तो राजनैतिक पार्टियां जघन्य अपराधी, हत्या, रेप, घोटालें करने वाले अपराधी व्यक्तियों को माननीय संसद सदस्य कैसे बना सकती हैं? क्या यह जनता के प्रति अन्याय नहीं है? इसे रोकें। पार्टियां इससे बचें।


भारतीय मतदाता संगठन मतदाताओं की तरफ से राजनैतिक पार्टियों को इस अवसर पर ऐसे समय में यह भी निवेदन कर रही है कि युवकों के लिए स्थान बनाएं। अधिक से अधिक टिकटें उत्साही, निःस्वार्थी, योग्य युवकों को दें ताकि जोश और होश बढे़। तभी लोकतन्त्र का विकास तेज गति से होगा। लोकतन्त्र की गुणवत्ता बढे़गी। संसद और विधानसभाओं को बूढ़ें लोगों से भरना ठीक नहीं हैं। वृद्ध व्यक्ति अपने अनुभव को युवक कार्यकर्ताओं से, पदाधिकारियों से बिना पद पर रहते हुए भी सलाह के माध्यम से शेयर कर सकते हैं। बूढ़ें / वृद्ध लोगों को राजनीति में रखने के लिए अनुभव का बहाना ठीक नहीं हैं। अगर ऐसा नहीं किया गया तो भविष्य में ऑल यूथ पार्टियां बन जायेगी।

सभी पार्टियां महिला सशक्तिकरण की बात करती हैं। 33 प्रतिशत रिजर्वेशन देने के लिए वर्षों से सभी पार्टियां टालमटोल कर रही है। भारत में अब महिलाएं ज्यादा पढ़ी-लिखी है। ज्यादा योग्य है लड़कों से। किसी भी परीक्षा के रिजल्ट देखें। ऐसे में कानूनी 33 प्रतिशत आरक्षण महिलाओं को मिलें या न मिले प्रत्येक पार्टी को चाहिए कि 33 प्रतिशत टिकटें महिलाओं को दें। इससे सजग परिवर्तन आयेगा। मतदाता संगठन की सोच के अनुसार अब तो ऑल वुमन राजनैतिक पार्टियों का गठन होना शुरु हो गया है। आने वाले कुछ वर्षों में ऐसी राजनैतिक पार्टियां सशक्त बन जायेगी। इसलिए राजनैतिक पार्टियों को चाहिए कि महिलाओं का अधिक से अधिक या हो सके तो 33 प्रतिशत टिकटें दें।


लोकतन्त्र में भारत के मतदाताओं का ही सर्वोच्च निर्णय होता है लेकिन जब तक राजनैतिक पार्टियां संतुलित तरीके से योग्य व्यक्तियों को ही उपरोक्त बातों को ध्यान में रखते हुए चुनाव के लिए प्रत्याशी चयन नहीं करते है तो मतदाता ठगे रह जाते है। राजनैतिक पार्टियों को चाहिए कि सही किस्म के प्रत्याशियों को अवसर दें तभी मतदाता सही जनप्रतिनिधियों को चुन सकेगें अन्यथा नहीं। सही जनप्रतिनिधि ही सही मजबूत सरकार बना सकते हैं। अपराधी प्रत्याशी कभी भी अच्छी सरकार नहीं दे सकते हैं। मतदाता भी इन बातों का ध्यान रखें और अपने वोट इन्हीं तथ्यों पर विचार करके दें।