ALL व्यापार राजनीति स्वास्थ्य साहित्य मनोरंजन कृषि दिल्ली शिक्षा राज्य धर्म - संस्कृति
महिलाओं के लिये
June 4, 2019 • सत पाल

 देश की तमाम गतिविधियों का  केन्द्र है—दिल्ली और यहां हर दिन, सुबह शाम जन जन के कल्याण  की चर्चा होती है। दो दशक हो गये महिलाओं के हितों के कथित रखवाले, संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिये 33 फीसदी आरक्षण पर सहमति नहीं बना सके। ऐसा करने में उन्हें यह महसूस होता है कि उनके प्रतिनिधित्व पर डाका डाला जा रहा है। पालिकाओं, पंचायतों और नगर निगमों में आरक्षण महिलाओं को मिला जरूर है मगर उनके अधिकारों का उपयोग, दुरुपयोग स्वार्थ सिद्ध करने के लिये उनके पति या पिता कर रहे हैं। मजबूरी में इतना तो पुरुष बर्दाश्त कर रहे हैं मगर संसद और विधानसभाओं में 33 फीसद आरक्षण के सवाल पर कोई न कोई बहाना बना कर हर बार बाधा उत्पन्न् करते रहते हैं मगर जहां महिला के किसी मुद्दे पर उन्हें वोटों की लहलहाती फसल दिखायी देती है तो वह बेहद सक्रियता दिखाने में कोई कमी नहीं रहने देते। चुनाव की आहट को देखते हुये तो ऐसी सक्रियता काफी बढ़ने लगती है। दिल्ली में सरकारी बसों यानी दिल्ली परिवहन निगम- डीटीसी की बसों में और दिल्ली मेट्रो में सभी महिलाओं को मुफ्त यात्रा का तोहफा देने की चर्चा जोरों पर है। मेट्रो में विद्यार्थियों और बुजुर्गों को रियायती दर पर यात्रा के मुद्दे पर आज तक कोई निर्णय नहीं लिया गया। मेट्रो रियायत देने को तैयार नहीं होती क्योंकि उस पर जापान का बहुत अधिक कर्ज है। इस वजह से उसके रखरखाव के काम को गति नहीं मिल रही। जहां तक डीटीसी बसों का प्रश्न है ये दिल्ली सरकार के तहत आती हैं इसलिये दिल्ली सरकार कोई भी निर्णय लेने को स्वतंत्र है मगर डीटीसी के बढ़ते घाटे पर भी तो गौर किया जाना चाहिये। खबर है कि मेट्रो से कहा गया है कि वह बताये कि महिलाओं को मुफ्त यात्रा की सुविधा देने पर उसे हर महीने कितना नुकसान होगा । लगता है कि दिल्ली सरकार हर महीने इस घाटे की भरपाई करेगी। दिल्ली सरकार जनता की सुख सुविधा के लिये बड़े निर्णय लेने के लिये विश्व विख्यात है और यही उसकी पहचान है लेकिन देखना यह है कि मुफ्त यात्रा की सुविधा मिलने पर महिलायें क्या जरूरत से ज्यादा सफर नहीं करेंगी। क्या मेट्रो में यात्रियों की बेतहाशा भीड़ नहीं बढ़ेगी। इससे क्या अन्य यात्रियों की दिक्कतें नहीं बढ़ेंगी। इन सभी पहलुओं पर विचार किये जाने की जरूरत है और साथ ही यह भी सोचना होगा कि छात्रों और सीनियर सिटिजन को कुछ रियायत तो मिले। महिला सुरक्षा के नाम पर उन्हें मुफ्त यात्रा सुविधा देने से पहले बसों और मेट्रो में चप्पे चप्पे पर सुरक्षा गार्ड तैनात करना आवश्यक होगा और यह भी सोचना होगा कि लाखों की तादाद में मुफ्तखोर बनाने से देश और दिल्ली की अर्थवयवस्था पर क्या असर होगा।