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ट्रैफिक जाम पर सुप्रीम कोर्ट की निगरानी
November 25, 2018 • सजग ब्यूरो

हमारी सरकारें, खास तौर पर म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन बेहद निकम्मी हो गई हैं, तभी तो ट्रैफिक मैनेजमेंट के लिए भी सुप्रीम कोर्ट को निगरानी रखनी पड़ रही है। दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट ने सीधे पुलिस कमिश्नरों को आदेश दिए हैं कि ट्रैफिक जाम समाप्त किए जाएं।

सुप्रीम कोर्ट का आदेश है कि हाईवे व सड़क के किनारे धर्मिक स्थल न बनाए जाएं। तमाम सरकारों ने धार्मिक जगहों को हटाने की जगह पर सड़क को ही हाईवे श्रेणी से बाहर कर दिया। देश में शायद ही ऐसी कोई सड़क होगी जहां पर मंदिर या दूसरी धार्मिक जगहें न बनी हों। सड़क पर ही नहीं, शहरों में भी भीड़ को देखें तो सबसे ज्यादा कब्जा पूजा वाली जगहों के पास ही दिखता है।

यह जगजाहिर है कि हमारे देश में शहरों में अगर ट्रैफिक जाम लगता है तो संकरी सड़कों की वजह से कम बल्कि सड़कों पर बनी दुकानों, गलत ढंग से पार्क की गई गाड़ियों, मनमौजी पैदल चलने वालों, सरकारी व निजी बसों और ऑटो रिक्शा के जहां चाहा वहां रूक जाने के कारण ज्यादा लगता है। सुप्रीम कोर्ट अब इसमें भी दखल देने को मजबूर हो गया।

 

हमारी देश की सड़कें असलियत में गरीब की जोरू, सबकी भाभी ही नहीं बल्कि मुफ़त की सैक्स वर्कर्स हैं जिन्हें जो जब चाहे, रौंद कर चला जाता है। यहां एक नहीं बल्कि कई-कई विभाग एक सड़क के जिम्मेदार होते हैं। सड़कों से दुकानें हटवाना कॉर्पोरेशनों की जिम्मेदारी है। सड़कें राज्य के लोक निर्माण विभाग यानी पब्लिक वर्ल्स डिपार्टमेंट और केंद्र के नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑपफ इंडिया की हैं और पाइप जल विभाग के हैं, रोशनी बिजली विभाग की हैं, होर्डिग्स कॉर्पोरेशनों के हैं और बसें ट्रांसपोर्ट विभाग के अधीन हैं लेकिन कोई भी सड़कों की सेहत के लिए चिंतित नहीं। सभी इन्हें रौंदते हैं।

धार्मिक जगहों के बाहर भीड़ के लिए केवल मंदिर ही दोषी नहीं हैं बल्कि मस्जिद, चर्च और गुरूद्वारे भी भीड़ के लिए जिम्मेदार होते हैं। ऐसे में सड़क पर चलने वाले हर किसी को तकलीफ होती है। जरूरी है कि धार्मिक जगहों के सामने होने वाली भीड़ को रोका जाए। त्योहारों और दूसरे मौकों पर यह परेशानी ज्यादा बढ़ जाती है। दर्शन करने वालों को भी सड़क पर लगे जाम से रूबरू होना पड़ता है। इसके बाद भी वे धर्म के नाम पर सहन करते हैं।

एक बार गायक सोनू निगम ने मस्जिद में लगे लाउडस्पीकर पर सवाल उठाया था। ऐसे में उनका विरोध होने लगा। दरअसल, धर्म को लेकर कायम अंधविश्वास को लेकर सभी एकमत हैं। मंदिर के समर्थकों को लगता है कि अगर मस्जिद के लाउडस्पीकर पर सवाल उठेंगे तो मंदिर के लाउडस्पीकर भी हटाने पड़ेंगे। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने बयान में कहा था कि जब हम सड़क पर होने वाली नमाज को नहीं रोक सकते तो हमें कांवड़ यात्रा को रोकने का हक नहीं है।

दरगाह के सामने भी ऐसी भारी भीड़ जुटने लगी है। वहां भी फूल से लेकर चादर और दूसरे सामान बिकने लगे हैं। इन दुकानों से पुलिस से लेकर जिला प्रशासन तक कोई वसूली नहीं कर पाता है। इस वजह से वहां दुकान लगाने वालों को आसानी रहती है। धर्म के नाम पर किसी तरह का भी संरक्षण मिल जाता है। ऐसे में अब धार्मिक जगहें किसी न किसी तरह से दुकानों के अड्डे बनती जा रही हैं। सड़कों की बदहाली की वजह से नागरिकों के सड़कों पर हर रोज दो घंटे अतिरिक्त लगते हैं। जहां भी टोल मार्ग बनते हैं, वहां अचानक ट्रैपिफक जाम समाप्त हो जाता है क्योंकि वहां प्रबंधन एक कंपनी का रह जाता है। लगता है कि न सरकारी अपफसर, न नेता कुशल हैं और न ही उन्हें इसमें कोई दिलचस्पी है। हां, यदि पैसा बनता है तो सब तैयार हैं।