जिंदा होगा घंटा घर
August 13, 2019 • सत पाल

पुरानी दिल्ली, शाहजहांबाद में आजादी से पहले और इसके बाद 1886 से 2010 तक दिल्ली म्यूनिसिपल कमेटी और दिल्ली नगर निगम  के दफ्तर के रूप में आबाद रहे टाऊन हॉल में 1956 में रखरखाव की खामियों की वजह से शहीद हुआ घंटाघर फिर जिंदा होगा। उस जमाने की बात करें तो घंटाघर काफी अहमियत रखता था। उस दौर में न तो लोगों के पास हाथ की कलाई पर बांधने वाली और न ही घरों में दीवार पर लगाने वाली घड़ियां हुआ करती थीं। लोग या तो धूप आने या ढलने से वक्त का अंदाजा लगाया करते थे या फिर लगभग सभी छोटे , बड़े शहरों में बने घंटाघर को देखने जाया करते थे या फिर उधर से आ रहे लोगों से कितना वक्त हुआ पूछ लिया करते थे। घंटाघर के चारों और घंटियों वाली घड़ियां लगी होती थीं और वहां से हर घंटे के बाद घंटी सुनाई देती थी। अक्सर रात के अंधेरे में घंटाघर निंदयाए दिखा करते थे क्योंकि वहां से समय देखना मुश्किल था। बाद में यह भी आलम देखा गया जब कई शहरों में घंटाघर खराब हो गये और उनकी मरम्म्त की किसी ने जरूरत नहीं समझी क्योंकि उस समय तक किस्म किस्म की घड़ियां घरों और कलाइयों की शोभा बन गयी थीं। मगर चादनी चौक का घंटाघर ऐतिहासिक था और उसकी शहादत यानि गिर जाने की चर्चा पूरे देश में होती रही। इसके ढहने से मलबे में दब कर कुछ लोगों की मौत हुई थी। मरने वालों के परिवार ने म्यूनिसिपल कमेटी से मुआवजे की मांग करते अदालत में मुकदमा दायर किया। यह मुकदमा टॉर्टस लॉ के तहत चला और मृतकों के बचे हुये संभावित जीवन के आधार पर मुआवजा तय किया गया। हाई कोर्ट ने माना कि घंटाघर गिरने के लिये म्यूनिसिपल कमेटी जिम्मेदार थी क्योंकि इसने अपने कांम्पलेक्स में बने इस ऐतिहासिक घंटा घर की ऱखरखाव करने में लापरवाही बरती। नया घंटाघर बनाने का फैसला चांदनी चौक की पुनर्विकास योजना के तहत किया जायेगा। अब नया घंटाघर आकर्षक और आधुनिक होगा, बहरहाल सभी लोग इसका इंतजार करेंगे। चांदनी चौक की सड़क के बीचोंबीच कभी बहुत पहले नहर हुआ करती थी जो समय के साथ विलुप्त हो गयी। अब क्योंकि पानी की कमी के कारण नहर बनाना न तो संभव और न ही भीड़भाड़ के कारण व्यावहारिक नहीं लगता। इसलिये सड़क के बाचोंबीच लगभग एक किलेमीटर 500 मीटर लंबी पट्टी  सुंदर बनायी जा रही है। इसका ज्यादातर काम पूरा हुआ दिखता है और यहां राजपथ जैसी हरियाली और सुंदर पब्लिक आर्ट से देखने लायक नजारा बनाया जा रहा है। यही तय था कि पुनर्विकास का काम 15 अगस्त तक हो जायेगा, इंतजार बाकी है।