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कचरा प्रबंधन में नई मिसाल
September 25, 2018 • Satpal

कभी कभी दिल्ली के नौजवान ऐसा कर दिखाते हैं जिससे भविष्य की बेहतरी की बुनियाद बन जाये और उनका योगदान सबके लिये न भूलने वाली याद बन जाये। दिल्ली के तीन पढ़े लिखे युवकों में कुछ अनूठा करने की ललक है। उन्होंने नौकरी छोड़ कर स्टार्ट अप के तहत एक एप बनाया है। अब समझदार लोग इस एप के दीवाने हैं। उन्होंने कचरा प्रबंधन और पर्यावरण सुरक्षा के मकसद से जंकआर्ट एप बनायी जिसे डाउनलोड किया जा सकता है। जंकआर्ट दरअसल कबाड़ी की ऐसी दुकान संचालित कर रहा है जो आपके घर या दफ्तर आ कर  कबाड़ और कचरे को सही तोल कर अच्छे दाम पर खरीदती है। केवल रद्दी और टूटी फूटी बोतल तथा प्लास्टिक ही नहीं हर तरह का कबाड़ जंकआर्ट के लिये सोने जैसा उपयोगी और फायदेमंद है। जंकआर्ट यह विश्वास दिलाता है कि खरीदे गये कचरे के अधिकाधिक भाग को रिसाइकिल किया जायेगा जिससे स्वच्छता अभियान की कामयाबी में बड़ा योगदान दिया जा सकेगा। हमारा देश भारत आज संसार में सबसे ज्यादा ई- कचरा पैदा करने वाले देशों में पांचवे स्थान पर है।  हम अब तकनीक का बहुत ज्यादा उपयोग करते हैं और इसलिये ई कचरा अधिक निकलता है जिसका निपटान करना भविष्य की बड़ी चुनौती बन रहा है। जंकआर्ट का मानना है कि उसकी प्राथमिकता रिसाइकलिंग को बढ़ावा देना। इसलिये वह दिल्ली के लोगों को रद्दी आदि के अलावा ई-कचरा भी कबाड़ी को देने की नसीहत देता है। दिल्ली एनसीआर से निकलने वाले कचरे में 40 फीसद  रिसाइकल किया जा सकता है और इस 40 फीसद में ज्यादातर ई-कचरा होता है। इन युवकों ने बताया कि ई- कचरा केवल मुफ्त में फेंक देने या बच्चों के खेलने के लिये नहीं होता अपितु इसके रिसाइकल करने से टिकाऊ वस्तुयें बनती हैं। महानगर में ऑनलाइन कबाड़ी सेवा से दिल्ली में 150 वेंडर जुड़े हैं और अब तक लगभग 60 हजार लोग इस एप से कबाड़ बेच रहे हैं। जंकआर्ट ने एक हजार से ज्यादा कबाड़ी वेंडरों का नेटवर्क बना लिया है। एप का फीडबैक बेहतरीन है तभी तो  यह दक्षिणी दिल्ली में अपनी पहचान बनाने के बाद अन्य नजदीकी तथा दक्षिण के राज्यों में पांव पसार रहा है। अब घरों में महिलाओं तथा बच्चों को यह समझाने की जरूरत है कि मोबाइल के बेकार सैट, चार्जर, लीड, रेडियो, ट्रांजिटर, फ्रिज, वाशिंग मशीन के टूटे फूटे हिस्से पुर्जें भी कबाड़ी खरीद रहा है जंकआर्ट ने इसकी खरीद आसान बना दी है। अगर दिल्ली के नगर निगम ई- कचरे को कबाड़ में बेचे जाने पर बल दें तो कचरा प्रबंधन के दायरे का विस्तार हो सकता