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उद्योगों और किसानों की कर्ज माफ़ी की तरह व्यापारियों ने भी क़र्ज़ माफ़ी की मांग
December 25, 2018 • Shiv Sachdeva

कैट शुरू करेगा राष्ट्रीय आंदोलन - 12 -13 जनवरी को भोपाल में राष्ट्रीय मीटिंग

पहले कॉपरिट सेक्टर और बड़े उद्योग एवं अब किसानों की कर्ज माफ़ी को देश की अर्थव्यवस्था को एक बड़ा झटका और देश के करोड़ों करदाताओं के साथ विश्वासघात बताते हुए कॉन्फेडरेशन ऑफ़ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने मांग की है की यदि इसी तरह ये कर्ज माफी जारी रहती है तो देश के 7 करोड़ व्यापारियों में से जिन्होंने कर्ज लिया हुआ है उनका भी कर्जा माफ़ किया जाए और करों में रियायतें दी जाएँ ! कैट ने इस मुद्दे पर एक बड़ा राष्ट्रीय आंदोलन शुरू करने की चेतावनी भी दी है ! इस सम्बन्ध में व्यापक विचार करने और भविष्य की रणनीति तय करने के लिए कैट ने अपनी राष्ट्रीय गवर्निग कॉउन्सिल की एक मीटिंग आगामी 12 -13 जनवरी को भोपाल में आई है जिसमें देश के सभी राज्यों के बड़े व्यापारी नेता भाग लेंगे !

कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री बी.सी.भरतिया एवं राष्ट्रीय महामंत्री श्री प्रवीन खंडेलवाल ने आज यहाँ स्पष्ट शब्दों में कहा की क़र्ज़ माफ़ी राजनैतिक दलों का वोटों का कारोबार है और संविधान में किसी भी सरकार को यह अधिकार नहीं दिया गया है की वो अपनी मनमर्जी से देश के कोष में से इस प्रकार कर्जा माफ़ कर बैंकों पर इसका बोझ डाल कर बैंकिंग प्रणाली को तहस नहस कर दें और उनके एनपीए बढ़ा दें ! उन्होंने कहा की क़र्ज़ माफ़ी से देश आर्थिक विषमता का शिकार होता है और सरकार नीतिगत रूप से लाचार बन जाती है ! देश के करोड़ों करदाता देश के विकास की आशा में कर देते हैं। न की मनमर्जी से वोटों का कारोबार करने के लिए कोई सरकार लुभावनी क़र्ज़ माफ़ी करे ! इसकी बजाय क़र्ज़ माफ़ी देने वाले वर्गों को सक्षम और मजबूत बनाया जाए जिससे उन्हें क़र्ज़ माफ़ी की दरकार ही न हो !अगर किसी भी सरकार को इस तरह का कोई क़र्ज़ माफ़ करना है तो वो अपने राजनैतिक दल के पैसे से क़र्ज़ माफ़ करे न की सरकारी खजाने को मनमाने तरीके से लुटाए ! देश में 7 करोड़ छोटे व्यावसायी प्रति वर्ष लगभग 42 लाख करोड़ रुपये का व्यापार करते हैं। जिसमें से केवल 4 प्रतिशत को ही बैंकों से कर्जा मिलता है ! बाकी व्यापारी ऊँची ब्याज दरों पर अन्य साधनों से कर्जा लेते है। इस पर अब रोक लगनी जरूरी है और व्यापारियों को आर्थिक पैकेज मिलना चाहिए ! कैट देश के सभी राज्यों में इस मुद्दे पर एक बढ़ा आंदोलन चलाएगा!

कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री बी.सी.भरतिया एवं राष्ट्रीय महामंत्री श्री प्रवीन खंडेलवाल ने कहा की देश में व्यापारी वर्ग सरकार के लिए बिना किसी पारिश्रमिक लिए राजस्व इकट्ठा करने का काम करता है और अनेक प्रकार की कागजी कार्यवाही, जटिल क़र प्रक्रिया और उस पर होने वाले खर्च को व्यापारी वहन करता है वहीं जरा सी भी त्रुटि हो जाने पर दंड एवं अन्य परेशानियों को भुगतता है लेकिन यदि कोई प्राकृतिक आपदा आ जाए जिसमें व्यापारी को सबसे ज्यादा नुक्सान होता है तो आज तक उसके लिए कोई क़र्ज़ माफ़ी या अन्य सुविधा किसी भी सरकार ने नहीं दी है जबकि वोटों के लालच में प्रतिवर्ष किसानों का कर्जा माफ़ क़र उन्हें पंगु बनाया जाता है!

श्री भरतिया एवं श्री खंडेलवाल ने जोर देकर कहा की व्यापारियों ने कोई गुनाह नहीं किया है और क़र्ज़ माफ़ी उन्हें भी मिलनी चाहिए क्योंकि देश की अर्थव्यवस्था और रोजगार देने में उनकी बहुत महत्वपूर्ण भूमिका है जिसे नकारा नहीं जा सकता और यह भी एक तथ्य है की आज तक किसी भी राज्य अथवा केंद्र सरकार ने व्यापारियों को कभी भी कोई आर्थिक पैकेज नहीं दिया है।